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भूखे पेट बारिश में रात भर भीगते रहे ग्रामीण

- बरसात में मकान तोडक़र प्रशासन ने किया मानवता को शर्मशार


बरसात के मौसम में सरकारी जमीन से मकान तोड़े जाने के बाद बेघर हुए नरियरा के दो दर्जन परिवार पिछले दो दिनों से खुले आसमान के नीचे भूखे पेट रहकर रात गुजार रहे हैं, अतिक्रमण दस्ते ने ग्रामीणों के सामान को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है, जिससे अब उनके सामने कई तरह की समस्या खड़ी हो गई है।
जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत नरियरा के मुख्य मार्ग पर स्थित सरकारी जमीन से बेजा-कब्जा हटाने का सरपंच से प्रस्ताव मिलने के बाद सोमवार की सुबह एसडीएम एम.एल. सिरदार व तहसीलदार एस.एस. दुबे गांव पहुंचे और उन्होंने पुलिस व राजस्व अमले के सहयोग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। अतिक्रमण दस्ते ने घंटे भर के भीतर दो दर्जन मकानों को ढहा दिए। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों को सामान हटाने की मोहलत भी नहीं दी गई, जिससे मकान के साथ सारा सामान मलबे में दब गया। भरे बरसात में मकान ढहने से ग्रामीणों के सिर से छत छिन गई और वे परिवार सहित सडक़ पर आ गए। आशियाना उजडऩे से ग्रामीण सोमवार की रात चूल्हा भी नहीं जला पाए, वहीं रात भर जमकर बारिश हुई, जिसके कारण ग्रामीण भीगते रहे। प्रभावित ग्रामीण मंगलवार की सुबह अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ कलेक्टोरेट पहुंचे और कलेक्टर ब्रजेश चंद्र मिश्र से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई। मकान टूटने के बाद बेघर हुई पीतर बाई ने बताया कि अब उसे आशियाने की चिंता सताने लगी है। वह पिछले 25 वर्षो से अपने परिवार के साथ मकान में रह रही थी। उसके 5 पोते है, जिनकी उम्र 2 से 5 साल के बीच है। मकान टूट जाने से उसके पोते पूरी रात बारिश में भीगते रहे है, उसे अब कलेक्टर से ही न्याय की उम्मीद है। ममता निर्मलकर ने बताया कि प्रशासन की उदासीनता के कारण बरसात के मौसम में उनके सिर से छत छिन गई। कार्रवाई के पहले राजस्व अमले ने नोटिस भी नहीं दिया था। एकाएक अतिक्रमण दस्ते ने कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे उनका सारा सामान बर्बाद हो गया। अब तो उनके पास राशन व कपड़े भी नहीं रह गए हैं। ऐसे में उन्हें खासी दिक्कत हो रही है। बेघरबार होने की शिकायत लेकर कलेक्टोरेट पहुंची पकली बाई (70 वर्ष) ने बताया कि अतिक्रमण दस्ते ने बिना सूचना के कार्रवाई शुरू कर दी और ग्रामीणों को सामान हटाने का मौका भी नहीं दिया। इसका विरोध करने पर कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे उठाकर दूर फेंक दिया, जिससे उसे चोंटे आई है। घर ढहने से उसके बेटे के छोटे-छोटे बच्चे खुले आसमान के नीचे रात भर सो नहीं सके। मकान ढहने से परेशान त्रिवेणी बाई ने बताया कि उसकी तीन बहुएं गर्भवती है, जिनकी जचकी जल्द ही होने वाली है। इस बात की जानकारी देते हुए उसने तहसीलदार से कुछ दिनों की मोहलत मांगी थी, लेकिन अतिक्रमण दस्ते ने उनकी एक न सुनी और महिलाओं को घर से खदेडक़र मकान ढहा दिया।
बहरहाल राजस्व अधिकारियों ने मानवता को तार-तार करते हुए बरसात में मकान ढहाकर ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे रहने मजबूर कर दिया है, जिससे प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं।

2 टिप्पणियाँ:

राकेश कौशिक 10 जुलाई 2011 को 6:23 am  

दुखद - अमानवीय कृत्य - साधुवाद

expression 20 जुलाई 2012 को 6:02 am  

दुखद है....

अनु

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